- ग्रामीणों ने चार मवेशी पकड़कर पुलिस को सौंपे, बाद में नवापारा कला की बस्ती से ट्रक में मिले 18 मवेशी

- चार मवेशियों की सुपुर्दगी का रिकॉर्ड कहां? बिना पंचनामा, टैगिंग और पशु चिकित्सकीय जांच के सुपुर्द करने का आरोप


सूरजपुर/प्रेमनगर। प्रेमनगर थाना क्षेत्र में मवेशी तस्करी को लेकर लगातार सामने आ रही घटनाओं ने एक बार फिर पुलिस की कार्यशैली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बड़े ट्रकों और अन्य वाहनों के माध्यम से मवेशियों की ढुलाई के आरोपों के बीच अब 23-24 अगस्त की रात सामने आया मामला पुलिस की कार्रवाई और पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर रहा है। ग्रामीणों द्वारा चार मवेशियों को पकड़कर पुलिस के सुपुर्द किए जाने के बाद नवापारा कला की बस्ती के घोघरा पारा में एक ट्रक से 18 मवेशियों की बरामदगी हुई। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब पुलिस के पास कुल 22 मवेशी होने चाहिए थे, तो कार्रवाई में 18 मवेशी ही क्यों दिखाई दे रहे हैं?

चौरी पहाड़ में ग्रामीणों ने पकड़े चार मवेशी

23 अगस्त को ग्राम कंचनपुर-फुलकोना क्षेत्र के चौरी धाम स्थित चौरी पहाड़ के पास मवेशियों को पैदल ले जाते हुए देखा गया। हमर उत्थान सेवा समिति के पदाधिकारियों एवं अन्य लोगों ने मौके पर पहुंचकर चार मवेशियों को पकड़ा और पुलिस के सुपुर्द किया। इस कार्रवाई के दौरान मौके पर मौजूद व्यक्ति के अनुसार, पुलिस को मवेशी सौंपे जाने के बावजूद उनकी विधिवत दस्तावेजी कार्रवाई को लेकर कई सवाल बने हुए हैं।

आरोप है कि मवेशियों का पंचनामा तैयार नहीं किया गया, पशु चिकित्सक को बुलाकर स्वास्थ्य परीक्षण नहीं कराया गया और उनकी पहचान के लिए टैगिंग भी नहीं की गई। इसके बाद चारों मवेशियों को ग्राम कंचनपुर-फुलकोना के एक व्यक्ति को सुपुर्द किए जाने की बात सामने आई। अब यही सुपुर्दगी पूरे मामले का अहम बिंदु बन गई है।

सूचना के बावजूद कार्रवाई में देरी का आरोप

चार मवेशियों को पुलिस को सौंपने के साथ ही नवापारा कला क्षेत्र में बड़ी संख्या में मवेशियों के मौजूद होने की सूचना पुलिस को दी गई थी। आरोप है कि सूचना मिलने के बावजूद प्रेमनगर पुलिस ने तत्काल कार्रवाई नहीं की। मामले की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों तक पहुंचने के बाद पुलिस सक्रिय हुई।

इसके बाद प्रेमनगर पुलिस ने रात में कार्रवाई करते हुए नवापारा कला की बस्ती के घोघरा पारा में ट्रक क्रमांक UP 71 T 9528 को पकड़ा। ट्रक के अंदर से 18 मवेशी बरामद किए गए। पुलिस के पहुंचने से पहले तस्कर और चालक मौके से फरार बताए गए। पुलिस ने सभी 18 मवेशियों को 24 अगस्त की सुबह प्रेमनगर थाना लाकर रखा।


22 मवेशी होने चाहिए थे, फिर 18 ही क्यों ?

पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल चार मवेशियों को लेकर है। यदि 23 अगस्त को चार मवेशी ग्रामीणों ने पुलिस को सौंपे थे और उसके बाद 18 मवेशी नवापारा कला की बस्ती से बरामद हुए, तो कुल संख्या 22 होनी चाहिए थी।

ऐसे में पुलिस को स्पष्ट करना चाहिए कि चार मवेशियों की थाने में क्या एंट्री हुई? उन्हें किसके सुपुर्द किया गया? क्या सुपुर्दगी का लिखित दस्तावेज बनाया गया? क्या पशु चिकित्सक से उनका स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया? क्या उनकी टैगिंग अथवा पहचान दर्ज की गई? और सबसे महत्वपूर्ण सवाल—क्या पुलिस ने यह सुनिश्चित किया कि सुपुर्द किए गए चारों मवेशी दोबारा तस्करी के लिए कहीं नहीं ले जाए गए ?


थाना परिसर में फोटो-वीडियो बनाने से रोकने पर भी सवाल

24 अगस्त की सुबह 18 मवेशियों को प्रेमनगर थाना लाए जाने के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने उनकी फोटो और वीडियो बनाने का प्रयास किया। आरोप है कि थाना में मौजूद आरक्षक दीपक यादव ने फोटो-वीडियो बनाने से मना करते हुए थाना प्रभारी से अनुमति लेने की बात कही।

बाद में मीडिया को कार्रवाई से संबंधित फोटो, वीडियो और जानकारी उपलब्ध कराने की बात कही गई, लेकिन दो दिन बाद तक पुलिस की ओर से विस्तृत प्रेस विज्ञप्ति, फोटो-वीडियो अथवा कार्रवाई का पूरा विवरण उपलब्ध नहीं कराए जाने की बात सामने आई है। इससे पुलिस की कार्यशैली और पारदर्शिता को लेकर सवाल और गहरे हो गए हैं।

इससे पहले 25 मवेशियों की कार्रवाई भी बनी थी चर्चा का विषय

इससे पहले 19-20 अगस्त की रात प्रेमनगर नगर पंचायत क्षेत्र में ग्रामीणों की सूचना पर करीब 25 मवेशियों के साथ एक ट्रक, दो पिकअप और दो बाइक पकड़े जाने का मामला सामने आया था। इस मामले में एक आरोपी गिरफ्तार हुआ था, जबकि चार अन्य आरोपियों के फरार होने की जानकारी सामने आई थी। उस कार्रवाई के बाद भी प्रेमनगर क्षेत्र में मवेशी तस्करी को लेकर सवाल उठते रहे। लगातार सामने आ रही घटनाओं के बीच अब यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि आखिर प्रेमनगर थाना क्षेत्र में मवेशियों की अवैध ढुलाई पर प्रभावी रोक क्यों नहीं लग पा रही है।

पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच की मांग

हमर उत्थान सेवा समिति ने प्रेमनगर क्षेत्र में मवेशी तस्करी के मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग की है। समिति का आरोप है कि प्रेमनगर थाने में लंबे समय से पदस्थ कुछ आरक्षक एवं प्रधान आरक्षक मवेशी तस्करी के मामलों में कथित रूप से संलिप्त हैं। समिति ने आईजी और एसपी से मांग की है कि लंबे समय से पदस्थ पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच कराई जाए तथा अन्य थाना में पोस्टिंग किया जाए। 


अब पुलिस को देना होगा चार मवेशियों का हिसाब

मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि चार मवेशियों की सुपुर्दगी का रिकॉर्ड कहां है? यदि चार मवेशी विधिवत किसी व्यक्ति को सौंपे गए हैं तो पुलिस को उसकी पूरी प्रक्रिया और दस्तावेज स्पष्ट करने चाहिए। वहीं यदि चार मवेशियों को लेकर कोई रिकॉर्ड नहीं है, तो यह पुलिस की कार्रवाई की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। ग्रामीणों ने चार मवेशी पकड़कर पुलिस को सौंपे, फिर 18 मवेशी बरामद हुए। 22 का हिसाब होना चाहिए था चार कहां गए ?