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“पुलिस के नाक के नीचे कैसे चल रहा था मवेशी तस्करी का इतना बड़ा खेल? ग्रामीणों ने उठाए गंभीर सवाल”

Cp Sahu 

प्रेमनगर। सूरजपुर जिले के प्रेमनगर थाना क्षेत्र में जंगल के बीच कथित मवेशी तस्करी का बड़ा मामला सामने आया है। ग्रामीणों की सजगता और साहस से मवेशियों को वाहनों में लोड किए जाने की सूचना पर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और तस्करी में इस्तेमाल किए जा रहे रास्ते में गड्ढा खोदकर वाहनों की आवाजाही रोक दी। ग्रामीणों और मौके पर मौजूद लोगों के बीच झूमाझटकी भी हुई। बाद में पुलिस को सूचना दी गई, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और 25 मवेशियों समेत एक 18 चक्का ट्रक, एक जेसीबी, दो पिकअप वाहन और दो मोटरसाइकिल जब्त की गईं। मामला प्रेमनगर नगर पंचायत के वार्ड क्रमांक 15 बहरियाडांड क्षेत्र का बताया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, 19 अगस्त की रात करीब 11 बजे जंगल क्षेत्र में जगेश्वर बंजारा के घर के पास मवेशियों को ट्रक में लोड किए जाने की सूचना ग्रामीणों को मिली। बताया गया कि मौके पर एक बड़े ट्रक में जेसीबी की मदद से मवेशियों को चढ़ाया जा रहा था। सूचना मिलते ही स्थानीय ग्रामीण मौके पर पहुंचे और उन्होंने वाहनों को रोकने के लिए रास्ते में गड्ढा खोद दिया। इसी दौरान ग्रामीणों और कथित तस्करी में शामिल लोगों के बीच विवाद और झूमाझटकी की स्थिति निर्मित हो गई। ग्रामीणों का दावा है कि उन्होंने मौके से वाहनों और मवेशियों को पकड़कर रखा तथा करीब रात 2 बजे पुलिस को इसकी सूचना दी।

ग्रामीणों का आरोप है कि प्रेमनगर क्षेत्र में लंबे समय से मवेशियों की तस्करी का खेल चल रहा है। उनका दावा है कि इससे पहले भी तीन से चार बड़े वाहनों में मवेशियों को ले जाते हुए देखा गया था और यह पांचवां वाहन था, जिसे ग्रामीणों ने पकड़कर पुलिस के हवाले किया। ग्रामीणों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि ग्रामीणों को जंगल के बीच चल रहे इस पूरे खेल की जानकारी हो सकती है तो पुलिस की निगरानी और गश्त व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। कुछ ग्रामीणों ने पुलिस संरक्षण के आरोप भी लगाए हैं, हालांकि पुलिसकर्मियों की संलिप्तता संबंधी इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और यह जांच का विषय है।


कांग्रेस नेताओं के हस्तक्षेप के बाद FIR का दावा

मामले में स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा और आरोप सामने आया है कि शुरुआत में पुलिस कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी और मामले में कथित तौर पर लीपापोती की आशंका जताई जा रही थी। ग्रामीणों और स्थानीय लोगों का दावा है कि कांग्रेस पार्टी के कुछ नेताओं के हस्तक्षेप के बाद पुलिस पर कार्रवाई का दबाव बना और इसके बाद मामला दर्ज किया गया। हालांकि पुलिस ने बाद में पांच लोगों को आरोपी बनाते हुए कानूनी कार्रवाई की है। ऐसे में अब यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि मामला स्पष्ट था और मौके से इतने बड़े पैमाने पर मवेशी, वाहन और मशीनरी जब्त हुई थी तो प्राथमिकी दर्ज करने में किसी बाहरी हस्तक्षेप की आवश्यकता क्यों पड़ी? इस संबंध में पुलिस का आधिकारिक पक्ष भी महत्वपूर्ण होगा।

पुलिस के अनुसार, मामले में पांच लोगों को आरोपी बनाया गया है। इनमें जगेश्वर बंजारा को हिरासत में लिया गया है, जबकि संतोष बंजारा, पंचु बंजारा, कल्लू बंजारा और शिवनारायण यादव के विरुद्ध भी मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने छत्तीसगढ़ कृषक पशु परीक्षण अधिनियम, 2004 की धारा 4, 6 एवं 10 तथा पशुओं के प्रति क्रूरता निवारण अधिनियम की धारा 11 के तहत कार्रवाई की है। पुलिस द्वारा जब्त किए गए 25 मवेशियों को थाना परिसर में रखा गया है तथा उनका पशु चिकित्सक से स्वास्थ्य परीक्षण कराया जा रहा है।


ग्रामीणों के सवालों ने बढ़ाई पुलिस की मुश्किल

स्थानीय ग्रामीणों का सवाल है कि जंगल के बीच रात के समय एक साथ 18 चक्का ट्रक, जेसीबी, दो पिकअप और अन्य वाहन आखिर किस उद्देश्य से पहुंचे थे? मवेशी कहां से लाए गए थे और उन्हें कहां ले जाया जाना था? वाहन मालिक और चालक कौन हैं? क्या यह पहली घटना है या लंबे समय से इसी रास्ते से मवेशियों को बाहर ले जाया जा रहा था? यदि ग्रामीणों के अनुसार इससे पहले भी तीन से चार बड़े वाहनों में मवेशियों को ले जाते देखा गया था तो पुलिस को इसकी जानकारी क्यों नहीं मिली? क्या क्षेत्र में नियमित पेट्रोलिंग और निगरानी होती है?

ग्रामीणों का यह भी कहना है कि उन्होंने खुद रास्ते में गड्ढा खोदकर वाहनों को रोकने की कार्रवाई की, जबकि पुलिस को बाद में सूचना दी गई। ऐसे में ग्रामीणों के बीच यह चर्चा है कि यदि वे मौके पर नहीं पहुंचते तो क्या मवेशियों से भरा ट्रक वहां से निकल जाता? अब पुलिस की जिम्मेदारी केवल जब्त मवेशियों और वाहनों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि पूरे नेटवर्क की जांच जरूरी है।

इस मामले ने प्रेमनगर पुलिस की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों द्वारा लगाए गए कथित संरक्षण और लीपापोती के आरोपों की भी निष्पक्ष जांच की जरूरत है। पुलिस को यह स्पष्ट करना होगा कि मवेशी कहां से आए, कहां भेजे जा रहे थे, वाहन किसके हैं, इस नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल हैं और क्या किसी प्रभावशाली व्यक्ति का संरक्षण प्राप्त था। फिलहाल पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है, लेकिन असली परीक्षा इस बात की होगी कि जांच केवल पांच आरोपियों और जब्त वाहनों तक सीमित रहती है या मवेशी तस्करी के पूरे नेटवर्क तक पहुंचती है।