- हमर उत्थान सेवा समिति ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर जवाबदेही तय करने की मांग की, कहा- केवल निलंबन नहीं, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो


- यदि प्रधानपाठक शराब के नशे में था तो उसका तत्काल मेडिकल परीक्षण (एमएलसी) क्यों नहीं कराया गया ?

-  क्या शिक्षा विभाग बिना मेडिकल परीक्षण के ही शराब पीने की पुष्टि कर देगा ?


सूरजपुर। रामानुजनगर विकासखंड के ग्राम साल्ही स्थित शासकीय प्राथमिक शाला खोरखोरीपारा के प्रधान पाठक हरिनंदन सिंह के कथित रूप से शराब के नशे में विद्यालय पहुंचने, छात्रों एवं शिक्षकों के साथ अभद्र व्यवहार करने और सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा निलंबन की कार्रवाई किए जाने के बावजूद मामला शांत नहीं हुआ है। सामाजिक संस्था हमर उत्थान सेवा समिति ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर पूरे शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए केवल शिक्षक ही नहीं, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों की भी जवाबदेही तय करने की मांग की है।

समिति का कहना है कि यदि शिक्षक वास्तव में शराब के नशे में था तो उसका तत्काल चिकित्सकीय परीक्षण (एमएलसी) क्यों नहीं कराया गया? शराब सेवन की पुष्टि विभागीय जांच नहीं बल्कि चिकित्सकीय परीक्षण से होती है। ऐसे में बिना मेडिकल परीक्षण के विभागीय जांच किस आधार पर की जाएगी? क्या भविष्य में यह मामला केवल वायरल वीडियो के भरोसे ही तय किया जाएगा?

समिति ने सवाल उठाया है कि घटना 8 जुलाई को हुई और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद 9 जुलाई को निलंबन का आदेश जारी हुआ। यदि वीडियो वायरल नहीं होता तो क्या विभाग कार्रवाई करता? क्या शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था केवल सोशल मीडिया पर निर्भर है?

प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि यदि शिक्षक पहले से शराब पीकर विद्यालय आता था तो जन शिक्षक, संकुल समन्वयक, विकासखंड शिक्षा अधिकारी तथा निरीक्षण करने वाले अन्य अधिकारी अब तक क्या कर रहे थे? क्या किसी अधिकारी ने इसकी सूचना वरिष्ठ कार्यालय को दी थी? यदि नहीं, तो क्या यह प्रशासनिक लापरवाही नहीं है?

समिति ने रामानुजनगर के प्रभारी विकासखंड शिक्षा अधिकारी अवधेश साहू से विभाग की ओर से प्रेस वार्ता कर पूरे मामले पर सार्वजनिक स्पष्टीकरण देने की मांग की है। साथ ही यह भी पूछा है कि उन्हें प्रभारी बीईओ के रूप में किस नियम के तहत जिम्मेदारी सौंपी गई और विद्यालयों की निगरानी व्यवस्था आखिर क्यों विफल रही।

प्रेस विज्ञप्ति में यह भी उल्लेख किया गया है कि पिछले वर्ष भी एक शिक्षक के शराब के नशे में पाए जाने का मामला सामने आया था। उस मामले में क्या कार्रवाई हुई, इसकी जानकारी आज तक सार्वजनिक नहीं की गई। समिति का कहना है कि अक्सर कर्मचारियों को निलंबित कर दूसरे कार्यालय में संबद्ध कर दिया जाता है, जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाता है और बाद में विभागीय जांच के नाम पर दोषमुक्त कर पूरा वेतन जारी कर दिया जाता है। इस मामले में भी ऐसी स्थिति नहीं होनी चाहिए।

समिति ने मांग की है कि इस पूरे प्रकरण में केवल प्रधान पाठक ही नहीं बल्कि निगरानी व्यवस्था से जुड़े सभी अधिकारियों की भूमिका की भी जांच हो। यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध भी कार्रवाई की जाए।


हमर उत्थान सेवा समिति ने कहा है कि सूरजपुर प्रदेश के वर्तमान मंत्री एवं पूर्व स्कूल शिक्षा मंत्री का गृह जिला है। ऐसे जिले में शिक्षा के मंदिर में इस प्रकार की घटना होना अत्यंत गंभीर विषय है। इसलिए केवल निलंबन आदेश जारी कर औपचारिकता पूरी करने के बजाय पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी व्यक्तियों एवं लापरवाह अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

समिति ने शिक्षा विभाग से सार्वजनिक रूप से इन सवालों का जवाब देने की मांग की है कि शिक्षक का मेडिकल परीक्षण क्यों नहीं कराया गया, वीडियो वायरल होने के बाद ही कार्रवाई क्यों हुई, निगरानी तंत्र पहले क्यों विफल रहा और विभागीय जांच की समय-सीमा क्या होगी। समिति का कहना है कि इस मामले में पारदर्शी कार्रवाई ही शिक्षा व्यवस्था पर जनता का विश्वास बनाए रख सकती है।