अज्ञात युवक की हत्या की जांच के बीच पुलिस पर मारपीट के गंभीर आरोप, पीड़ित किसान ने एसपी से लगाई न्याय की गुहार

तिवरागुड़ी में मिले अज्ञात युवक के शव मामले में नया मोड़, सूचना देने वाले किसान ने पुलिसकर्मियों पर मारपीट, धमकी और मेडिकल रिपोर्ट जब्त करने का लगाया आरोप; जांच के आदेश।

सूरजपुर। रामानुजनगर क्षेत्र के तिवरागुड़ी गांव में मिले अज्ञात युवक के हत्या मामले की जांच अब खुद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही है। एक ओर सफेद बोरे में रस्सियों से बंधा मिला युवक का शव अब तक शिनाख्त और हत्यारों के इंतजार में है, वहीं दूसरी ओर जांच के नाम पर एक किसान के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया है।

तिवरागुड़ी निवासी 58 वर्षीय भेजन राम ने पुलिस अधीक्षक सूरजपुर को लिखित शिकायत सौंपकर आरोप लगाया है कि हत्या की जांच के दौरान पुलिस ने उन्हें संदेह के आधार पर थाने बुलाकर पूरे दिन बैठाए रखा और शाम को छोड़ दिया। शिकायत के अनुसार अगले दिन पुलिसकर्मी उनके घर पहुंचे और अपराध स्वीकार कराने के लिए अमानवीय तरीके से मारपीट की।

पीड़ित किसान का आरोप है कि पूछताछ के दौरान डंडों से पिटाई की गई, जिससे उनका एक हाथ टूट गया। इसके अलावा शरीर के संवेदनशील अंगों पर भी गंभीर चोटें पहुंचीं। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि पुलिस ने इलाज से संबंधित मेडिकल दस्तावेज और एक्स-रे रिपोर्ट अपने कब्जे में ले ली तथा घटना की जानकारी किसी को देने पर धमकी भी दी।

भेजन राम का कहना है कि 12 जून को सबसे पहले उन्होंने ही अपने घर के पास पड़े संदिग्ध बोरे को देखा था। उन्होंने इसकी सूचना परिजनों, ग्रामीणों और सरपंच को दी, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची थी। लेकिन अब वही व्यक्ति खुद पुलिस कार्रवाई का शिकार होने का आरोप लगा रहा है।

गौरतलब है कि तिवरागुड़ी में मिले अज्ञात युवक के शव के हाथ-पैर रस्सियों से बंधे हुए थे। शव के सिर, चेहरे, गले और शरीर के अन्य हिस्सों पर धारदार हथियार से किए गए हमले के गंभीर निशान पाए गए थे। प्रारंभिक जांच में मामला हत्या का प्रतीत हुआ था, लेकिन घटना के कई दिन बाद भी न तो मृतक की पहचान हो सकी है और न ही आरोपियों का सुराग मिला है।

पीड़ित परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, कथित रूप से मारपीट करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने तथा परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। मामले को लेकर पूर्व खाद्य मंत्री अमरजीत भगत ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पुलिस की ऐसी छवि नहीं बननी चाहिए कि सूचना देने वाले व्यक्ति को ही आरोपी बना दिया जाए। उन्होंने दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

इधर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक योगेश देवांगन ने पुष्टि की है कि पुलिस स्टाफ पर मारपीट के आरोप संबंधी शिकायत प्राप्त हुई है। उन्होंने बताया कि मामले की जांच के लिए एसडीओपी प्रेमनगर को निर्देशित किया गया है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि हत्या की गुत्थी सुलझाने के दबाव में कहीं पुलिस ने किसी निर्दोष व्यक्ति को निशाना तो नहीं बनाया, या फिर इन आरोपों के पीछे कोई और सच छिपा है। फिलहाल अज्ञात युवक की हत्या और पुलिस पर लगे आरोप, दोनों मामलों की जांच समानांतर रूप से जारी है।यह खबर टीवी, वेब पोर्टल और अखबार तीनों के लिए उपयुक्त शैली में तैयार की गई है।