चंद्र प्रकाश साहू 

सूरजपुर /प्रेमनगर। विशेष पिछड़ी जनजातियों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के सरकारी दावों के बीच नगर पंचायत प्रेमनगर के एक पंडो परिवार की स्थिति इन दावों पर सवाल खड़े करती है। राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले पंडो समुदाय का यह परिवार आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है।


राशन कार्ड नहीं, बाजार से खरीदना पड़ता है चावल

नगर पंचायत प्रेमनगर के वार्ड क्रमांक 15 पोया डुग्गू वार्ड निवासी कमलेश पंडो अपनी पत्नी सविता पंडो और दो बेटियों के साथ रहते हैं। परिवार के पास राशन कार्ड नहीं होने से उन्हें सरकारी राशन का लाभ नहीं मिल रहा है। मजबूरी में बाजार से करीब 30 रुपये किलो की दर से चावल खरीदकर परिवार का भरण-पोषण करना पड़ रहा है।


आधार नहीं बनने से योजनाओं से वंचित

कमलेश पंडो ने बताया कि उनकी पत्नी सविता पंडो और दोनों बेटियों का आज तक आधार कार्ड नहीं बन पाया है। आवश्यक दस्तावेजों के अभाव में परिवार कई शासकीय योजनाओं के लाभ से वंचित है। राशन कार्ड बनवाने के प्रयास भी अब तक सफल नहीं हो सके हैं।


जंगल से लकड़ी बेचकर चल रहा गुजारा

परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। आजीविका चलाने के लिए कमलेश पंडो और उनके परिजन जंगल से लकड़ी लाकर बाजार में बेचते हैं। इसी से होने वाली मामूली आमदनी पर पूरे परिवार का गुजारा चल रहा है। नगर पंचायत क्षेत्र में रहने के बावजूद उन्हें मनरेगा के तहत भी रोजगार नहीं मिल पा रहा है।

पानी के लिए जंगल और नाले का सहारा

परिवार के सामने पेयजल संकट भी गंभीर है। घर के पास न तो नल की सुविधा है और न ही कोई नियमित जल स्रोत। परिवार को जंगल और नाले से पानी लाकर उपयोग करना पड़ता है। स्वच्छ पेयजल के अभाव में स्वास्थ्य संबंधी खतरे भी बने हुए हैं।

बिजली नहीं, अंधेरे में गुजरती हैं रातें

परिवार के घर तक आज तक बिजली नहीं पहुंची है। रात होने पर पूरा परिवार अंधेरे में रहने को मजबूर हो जाता है। इससे बच्चों की पढ़ाई और दैनिक जीवन भी प्रभावित होता है।

संघर्षों से भरी रही सविता की जिंदगी

ग्रामीणों के अनुसार सविता पंडो का जीवन भी कठिनाइयों से भरा रहा है। बचपन में ही उन्होंने अपनी मां को खो दिया था और नाना-नानी के संरक्षण में उनका पालन-पोषण हुआ। बाद में उनका विवाह कमलेश पंडो से हुआ। जिस घर में उन्होंने बचपन बिताया था, वह भी अब जर्जर होकर समाप्त हो चुका है। आज वे अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं।


विकास के दावों पर उठ रहे सवाल

जब विशेष पिछड़ी जनजाति का एक परिवार नगर पंचायत क्षेत्र में रहकर भी राशन कार्ड, आधार कार्ड, बिजली, पेयजल और रोजगार जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है, तो विकास और कल्याणकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत पर सवाल उठना स्वाभाविक है।


समिति ने प्रशासन से की कार्रवाई की मांग

हमर उत्थान सेवा समिति ने प्रशासन से मांग की है कि परिवार का तत्काल आधार पंजीयन कराया जाए, राशन कार्ड जारी किया जाए तथा बिजली, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही परिवार को शासन की सभी पात्र योजनाओं से जोड़कर उन्हें सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर प्रदान किया जाए।