हमर उत्थान सेवा समिति ने घटना को गंभीर बताते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।


"चंद्र प्रकाश साहू"

सूरजपुर/ प्रतापपुर। जंगलों में वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर किए जा रहे दावों के बीच सूरजपुर जिले के प्रतापपुर वन परिक्षेत्र से एक बेहद दुखद और चिंताजनक घटना सामने आई है। जंगल में टूटकर गिरे करंट प्रवाहित विद्युत तार की चपेट में आने से एक पूरे भालू परिवार की मौत हो गई। इस घटना ने वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था के साथ-साथ जंगल क्षेत्रों से गुजरने वाली बिजली लाइनों की सुरक्षा और निगरानी पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रतापपुर वन परिक्षेत्र के ग्राम पंचायत पार्वतीपुर स्थित झिंगरामाड़ा जंगल में शुक्रवार रात करंट की चपेट में आने से एक नर भालू, एक मादा भालू और उसके शावक की मौके पर ही मौत हो गई। प्रारंभिक जांच में 11 केवी विद्युत लाइन का तार टूटकर जमीन पर गिरना हादसे का कारण माना जा रहा है। घटना के बाद वन विभाग ने पंचनामा और पोस्टमार्टम की कार्रवाई कर जांच शुरू कर दी है।

जानकारी के अनुसार पार्वतीपुर स्थित वन विभाग की नर्सरी से लगभग 500 मीटर दूर वृक्षारोपण क्षेत्र कक्ष क्रमांक पी-17 में शुक्रवार रात एक भालू परिवार विचरण कर रहा था। इसी दौरान क्षेत्र से गुजर रही 11 केवी विद्युत लाइन का इंसुलेटर तेज आंधी और बारिश के कारण क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे तार टूटकर जमीन पर गिर गया। तार में विद्युत प्रवाह जारी रहने के कारण वह क्षेत्र मौत के जाल में तब्दील हो गया।

भोजन और पानी की तलाश में जंगल में घूम रहे नर, मादा और उनके शावक ने अनजाने में टूटे हुए तार के संपर्क में आते ही तेज करंट की चपेट में आकर दम तोड़ दिया। रात होने और मौसम खराब होने के कारण घटना की जानकारी तत्काल नहीं मिल सकी।

शनिवार सुबह ग्रामीणों से सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। उप वन मंडलाधिकारी संस्कृति बाले, प्रभारी रेंजर विजय तिवारी, डिप्टी रेंजर मान सिंह सहित विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण कर पंचनामा कार्रवाई पूरी की तथा मामले की जांच शुरू की।

घटना के बाद पशु चिकित्सकों की तीन सदस्यीय टीम ने मृत भालुओं का पोस्टमार्टम किया। टीम में डॉ. विवेक पैकरा, डॉ. गोविंदा साहू एवं डॉ. एस.एस. पटेल शामिल थे। चिकित्सकों ने पोस्टमार्टम के दौरान तीनों वन्यजीवों के शरीर पर करंट से झुलसने के निशान पाए तथा मौत का कारण विद्युत प्रवाह की चपेट में आना बताया। पोस्टमार्टम उपरांत वन विभाग द्वारा नियमानुसार जंगल में ही मृत भालुओं का अंतिम संस्कार किया गया।

घटना के बाद क्षेत्र के ग्रामीणों और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े लोगों में गहरा आक्रोश देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि जंगलों से गुजरने वाली विद्युत लाइनों का नियमित निरीक्षण और रखरखाव नहीं होने के कारण इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं। उनका मानना है कि यदि समय रहते लाइन की निगरानी और आवश्यक सुधार कार्य किए गए होते तो एक पूरे भालू परिवार की जान बचाई जा सकती थी।

इस संबंध में हमर उत्थान सेवा समिति ने घटना को गंभीर बताते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। समिति ने कहा है कि यह केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि संभावित लापरवाही का मामला प्रतीत होता है। समिति ने वन विभाग और विद्युत विभाग के अधिकारियों की संयुक्त जांच के लिए विशेष जांच दल गठित कर जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की मांग की है। साथ ही जंगल क्षेत्रों से गुजरने वाली विद्युत लाइनों का सुरक्षा नियमित निरीक्षण एवं रखरखाव सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया है, ताकि भविष्य में वन्यजीवों की मौत ना हो।