सुरजपुर में धान खरीदी घोटाला: धान गायब, भुगतान पूरा, हमर उत्थान सेवा समिति ने की सभी दोषियों पर FIR की मांग
सुरजपुर। जिले की धान खरीदी व्यवस्था इस समय सबसे बड़े प्रशासनिक संकट और संभावित घोटाले के दौर से गुजर रही है। भैयाथान विकासखंड के सावारांवा धान खरीदी केंद्र में करोड़ों रुपये मूल्य का धान कम पाया जाना अब केवल एक केंद्र की अनियमितता नहीं रह गई है, बल्कि यह पूरे जिले में फैली उस गड़बड़ी का प्रतीक बन चुका है, जिसमें सिस्टम के हर स्तर पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। राजस्व विभाग की टीम द्वारा किए गए भौतिक सत्यापन में भारी मात्रा में धान और वारदाना की कमी सामने आने के बाद यह साफ हो गया है कि धान खरीदी की पूरी प्रक्रिया कहीं न कहीं योजनाबद्ध तरीके से प्रभावित की गई है।
भौतिक धान नहीं, फिर भुगतान कैसे हुआ
सबसे गंभीर और चौंकाने वाला पहलू यह है कि जिस धान का भौतिक अस्तित्व ही नहीं मिला, उसका भुगतान पहले ही कर दिया गया है। यह भुगतान आखिर किन किसानों के नाम पर हुआ, उनके बैंक खातों में राशि कैसे पहुंची और किस अधिकारी के आदेश से यह भुगतान स्वीकृत किया गया इन सवालों का आज तक कोई स्पष्ट और सार्वजनिक जवाब सामने नहीं आया है। यही कारण है कि अब यह मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही का नहीं, बल्कि सीधे तौर पर आर्थिक अपराध की श्रेणी में आता दिखाई दे रहा है।
केवल समिति नहीं, पूरा तंत्र संदेह के घेरे में
सावारांवा केंद्र में उजागर हुई गड़बड़ी ने यह भी साफ कर दिया है कि यह खेल केवल समिति स्तर तक सीमित नहीं है। सूत्रों के अनुसार इस पूरे मामले में समिति प्रबंधन, नोडल अधिकारी, संबंधित बैंक और मार्फेड के अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। बिना आपसी मिलीभगत के करोड़ों रुपये का धान कागजों में दर्ज होना और भौतिक सत्यापन में गायब मिलना संभव नहीं माना जा रहा। यह स्थिति प्रशासन की निगरानी व्यवस्था की भी पोल खोलती है।
पहले भी सामने आ चुकी हैं भारी अनियमितताएं
इससे पहले भी जिले में इसी तरह की गंभीर अनियमितताएं सामने आ चुकी हैं। प्रेमनगर विकासखंड के ग्राम पंचायत उमेश्वरपुर सहकारी समिति में भौतिक सत्यापन के दौरान करीब 7036 क्विंटल धान और लगभग 17,591 नग वारदाना कम पाया गया था। इस मामले में बैंक द्वारा समिति प्रबंधक के खिलाफ उमेश्वर सलका पुलिस चौकी में आपराधिक प्रकरण दर्ज कराया गया। लेकिन यहां भी सवाल उठता है कि इतनी बड़ी मात्रा में धान और वारदाना की कमी क्या केवल एक प्रबंधक की जिम्मेदारी हो सकती है, या फिर इसके पीछे भी वही तंत्र काम कर रहा है, जो आज सावारांवा सहित अन्य केंद्रों में सामने आ रहा है।
जिले भर के केंद्रों में धान की भारी कमी
पूर्व में जिला प्रशासन द्वारा जारी अधिकृत विज्ञप्ति इस पूरे मामले को और गंभीर बना देती है। सावारांवा केंद्र पर करीब 6,470 बोरी (लगभग 2,588 क्विंटल) धान कम मिला। टुकुडांड में 16,032 बोरी (करीब 6,412.8 क्विंटल), शिवप्रसादनगर में 13,880 बोरी (करीब 5,552 क्विंटल) और सूरजपुर केंद्र पर 16,526 बोरी (करीब 6,610.4 क्विंटल) धान गायब पाया गया। सोनपुर सहकारी समिति में भी 10 हजार बोरी से अधिक धान की कमी सामने आई। चंदौरा धान खरीदी समिति में 2,045 बोरी (करीब 818 क्विंटल) और लटोरी धान खरीदी केंद्र में 10,919 बोरी (करीब 4,367.6 क्विंटल) धान की कमी भी उजागर हो चुकी है।
हमर उत्थान सेवा समिति का कहना है कि खाद्य विभाग, नोडल अधिकारियों और बैंक प्रबंधन की भूमिका
इन आंकड़ों के सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि जब लगभग सभी धान खरीदी समितियों में अनियमितता पाई गई, तो आपराधिक प्रकरण केवल कुछ चुनिंदा समितियों पर ही क्यों दर्ज किए गए। क्या बाकी समितियों में हुई गड़बड़ी कम गंभीर है, या फिर वहां के जिम्मेदारों को संरक्षण दिया जा रहा है। यह चयनात्मक कार्रवाई अब प्रशासन की निष्पक्षता पर सीधा सवाल खड़ा कर रही है।
हमर उत्थान सेवा समिति का सीधा आरोप
हमर उत्थान सेवा समिति ने इस पूरे मामले में प्रशासन के अलग-अलग विभागों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। समिति का कहना है कि खाद्य विभाग, नोडल अधिकारियों और बैंक प्रबंधन की भूमिका की निष्पक्ष जांच के बिना सच्चाई सामने नहीं आ सकती। लगातार मॉनिटरिंग के दावे किए जाते रहे, फिर भी करोड़ों रुपये का धान शार्टेज कैसे हो गया। यदि मॉनिटरिंग वास्तव में प्रभावी थी, तो यह गड़बड़ी अधिकारियों की जानकारी में क्यों नहीं आई, और यदि जानकारी में थी, तो कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
सरकारी धन का दुरुपयोग किसने किया
सबसे अहम और निर्णायक सवाल यह है कि सरकारी धन का दुरुपयोग किसने किया। धान के नाम पर जो भुगतान हुआ, उसका वास्तविक लाभ किसे मिला। जब तक पूरे जिले की धान खरीदी प्रक्रिया, भुगतान रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजेक्शन, किसानों की सूची और नोडल अधिकारियों की भूमिका की उच्चस्तरीय और स्वतंत्र जांच नहीं होती, तब तक यह आशंका बनी रहेगी कि यह घोटाला केवल कुछ लोगों पर डालकर दबाने की कोशिश की जा रही है।
हमर उत्थान सेवा समिति ने सभी दोषियों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग
अब जिले की जनता और किसान यह जानना चाहते हैं कि करोड़ों रुपये के इस घोटाले में आखिर जिम्मेदारी किसकी तय होगी। क्या कार्रवाई सिर्फ निचले स्तर के कर्मचारियों और प्रबंधकों तक सीमित रहेगी, या फिर सिस्टम के शीर्ष पर बैठे जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कानून का शिकंजा कसेगा। हमर उत्थान सेवा समिति ने मांग की है कि पूरे जिले में जिन-जिन धान खरीदी केंद्रों में धान की कमी पाई गई है, उन सभी के जिम्मेदारों पर बिना भेदभाव आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए। जब तक सभी दोषियों पर समान रूप से कार्रवाई नहीं होती, तब तक धान खरीदी व्यवस्था पर उठे सवाल और गहरे होते जाएंगे।